लम्बी ऊम्र की कामना या ज्यादा जीवित रहने की इच्छा शायद हर जीव में होती है इसीलिए बड़े बुजुर्ग शायद "आयुष्मान भव् "या "जीते रहो "का आशीर्वाद देते है |पर जीवित रहने या सुखपूर्वक जीने में जमीन-आसमान का अंतर है |
कौन सुखी है इस संसार में या किस तरह की स्थित को सुख कहते है यह मापदंड हर किसी का अलग-अलग है |
कौन सुखी है इस संसार में या किस तरह की स्थित को सुख कहते है यह मापदंड हर किसी का अलग-अलग है |
सच है।
ReplyDeleteसुखी जीवन क्या है इसको मापने का पैमाना सभी का अलग अलग है।
लेकिन प्रकृत्ति व नियति इस पैमाने पर एक ही सिद्धांत पर अडिग रहती है।
हाँ सच है पर चलना तो नियति के हिसाब से ही है
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